सभ्य समाज मे विकास की राह मे चल रहे थे इंसान
विकास की तेज गति मे हो अंधे ,बन गये कुछ हैवान।
एक नयी गलत पहल की तबाही का यह ऐसा प्रकोप
भुगतने को मजबूर हुये हम प्रकृति का यह भयकंर कोप।
कभी ना सोचा ना समझा हुआ था ना ऐसा अहसास
स्व गृह ही बन जायेगा कैदखाना नही हो रहा विश्वास ।
क्या हो रहा कैसे हो रहा यह एक अजीब सी दासता
जिंदगी मे कभी ना सोचा था पङेगा ऐसा भी वास्ता ।
प्रकृति प्रदत नहीं है ये महामारी मानव की स्वयं उत्पत्ति है
हैवानियत की चरम सीमा से अर्जित की गयी यह सम्पत्ति है।
सपना सा लग रहा है जिदंगी एक अलग दर्दे उल्लास
डर के इस माहौल मे भी एक नयी तरह की यह भोगविलास
कोई मनोरंजन का लुत्फ उठाता बना रहा टीकटाॅक
तो कोई परदेश से घर लौटने को मीलों कर रहा वाॅक
बंद पङी है रेलगाड़ी और ठप्प है देश के सारे सिस्टम
पहले कभी ना देखा जग मे परिस्थितियां ऐसी विषम
किसी को पङे है खाने के लाले तो कही बन रहे पकवान
भय और चिंता मे सभी याद कर रहे अपने अपने भगवान ।
वक्त ने ली है ऐसी करवट जिंदगी मे आ गया एक अजीब ठहराव
लाचारी और मजबूरी मे फंस गये जब कि नही थी कहीं कोई अभाव।
कोई परदेश तो कोई विदेश जाने का जो देखते थे ख्वाब
आज सारे के सारे किसी भी तरह घर पहुँचने को है बेताब।
गलियां सुनी नगर सुने है सुना है सारा संसार
लाॅकडाउन ने कर दिया चौपट सारा व्यापार
कल जो सोचे थे 5 ट्रिलियन डालर का सपना करने को साकार
भुल गये ये सब किसी तरह दो जून की रोटी दे-दे सरकार
इसीलिए कहते थे विज्ञान को ना करो प्रकृति से खिलवाड़
वर्ना इसी तरह कैद हो जाओगे घर मे बंद कर कीवाङ।
आज प्रकृति भी मुस्कुराते यूँ मंद मंद इठलाती दिख रही है
मदमाति हवायें फिजां मे है स्वच्छ नीर नदियों में बह रही है
पर अभागे मानव देखो तुम कैसी तेरी ये कार्यगुजारी है
प्रदूषण मुक्त स्वच्छंद हवा है फिर भी मुँह मे मास्क मजबुरी है ।
लाॅकडाउन की मजबुरी ने कर दिया सारे जग को सुनसान
माहौल बना है ऐसा जैसे सारा जग हो गया है शम्शान
बंद हो गयी सारी गतिविधियॉं जग को मिली है यह महामारी की सौगात
विश्व के सारे अहंकारी मानवों को कोरोना ने दिखा दी है अपनी औकात ।।
हाहाकार व चीत्कार करते करुण क्रंदन का है शोर
लाशों की कतार बिछी है सारे जग मे चारों ओर
बंद करो खिलवाड़ प्रकृति से सीख लो करना सभी से प्रेम
वर्ना जिंदगी यूँ ही सिमट जायेगी हो फूलों से सुसज्जित फोटो फ्रेम ।
निलेश का🙏🙏